Sunday Poetry Special By Mangilal Karir (मांगी क़रीर)

रेगिस्तान

रेगिस्तान में चलती गर्म तेज हवा,
न केवल धूल उड़ा कर ले जाती हैं।
वह ले जाती हैं किसी के सपनों को,
वो सपने जो रोज रात वह देखता हैं।
रात में चांद की शीतलता के तले,
वह बुनता है अपने लिये कुछ ख्वाब।
जो सुबह दिन चढ़ते ही बिखरने लगते है,
और उड़ने लगते हैं रेत के कण के समान।
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